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सावधान! 2026 के नए IT नियम लागू: क्या आपका मनोरंजन आपको जेल भेज सकता है? एआई और डीपफेक का पूरा कच्चा चिट्ठा

सावधान! 2026 के नए IT नियम लागू: क्या आपका मनोरंजन आपको जेल भेज सकता है? एआई और डीपफेक का पूरा कच्चा चिट्ठा
image source: Gemini
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Sandeep Vidyarthi28 मई 2026

नमस्ते! मैं बात कर रहा हूँ दैनिक रेडियो से, आज के दौर में अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, तो आपने डीपफेक (Deepfake) शब्द जरूर सुना होगा। कभी किसी अभिनेता की आवाज़ में गाना, तो कभी किसी नेता का चेहरा बदलकर बनाया गया मज़ेदार वीडियो एआई (AI) ने मनोरंजन के तरीके बदल दिए हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि आपकी एक छोटी सी मस्ती अब आपको सलाखों के पीछे पहुँचा सकती है? जी हाँ, भारत सरकार ने फरवरी 2026 से Information Technology (Amendment) Rules, 2026 लागू कर दिए हैं। ये नियम इतने सख्त हैं कि अब एआई के साथ खिलवाड़ करना आग से खेलने जैसा है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि ये नए नियम क्या हैं और आपको किन बातों का ध्यान रखना है।

3 घंटे की डेडलाइन: अब लुका-छिपी का खेल खत्म

सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव आया है कंटेंट हटाने के समय को लेकर। पहले अगर कोई गलत वीडियो वायरल होता था, तो उसे हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों (जैसे Instagram, YouTube, X) के पास काफी समय होता था। लेकिन अब नियम बदल गए हैं। नए कानून के तहत, अगर सरकार या कोर्ट किसी सिंथेटिक (AI से बने) कंटेंट को अवैध घोषित करती है, तो उसे सिर्फ 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।

यही नहीं, अगर मामला किसी की निजता (Privacy) या अश्लीलता (Non-consensual sexual content) से जुड़ा है, तो यह समय सीमा और भी कम होकर सिर्फ 2 घंटे रह गई है। इसका मतलब है कि अब अफवाहें फैलने से पहले ही उन्हें जड़ से खत्म करने की तैयारी है। अगर कंपनियाँ ऐसा नहीं करतीं, तो वे अपना Safe Harbour सुरक्षा कवच खो देंगी और उन पर करोड़ों का जुर्माना लग सकता है।

SGI क्या है? आसान भाषा में समझिए

सरकार ने इन नियमों में एक नया शब्द जोड़ा हैSynthetically Generated Information (SGI) सरल शब्दों में, कोई भी फोटो, वीडियो या ऑडियो जिसे एआई या किसी कंप्यूटर प्रोग्राम की मदद से बनाया या बदला गया हो ताकि वह असली लगे, उसे SGI कहा जाएगा। अब आप चाहे किसी का चेहरा बदलें या किसी की आवाज़ की मिमिक्री एआई से करवाएं, वह सब इस कानून के दायरे में आएगा।

AI Label अब कोई चॉइस नहीं, मजबूरी है

क्या आप रील्स (Reels) बनाते हैं? अगर आप किसी भी एआई टूल का इस्तेमाल करके कंटेंट बना रहे हैं, तो अब आपको उस पर साफ-साफ लिखना होगा कि यह AI-Generated है। सरकार ने आदेश दिया है कि यह लेबल प्रमुख और स्पष्ट (Prominent and Visible) होना चाहिए। यहाँ तक कि मेटाडाटा (Metadata) में भी यह जानकारी छिपी होनी चाहिए ताकि उसे हटाया जा सके। अगर आप बिना लेबल के एआई वीडियो पोस्ट करते हैं, तो आपका अकाउंट हमेशा के लिए सस्पेंड किया जा सकता है।

मनोरंजन या मुसीबत? कहाँ खींचनी है लकीर

अक्सर लोग कहते हैं, "अरे भाई, मैं तो बस मज़ाक कर रहा था!" लेकिन कानून मज़ाक नहीं समझता। अगर आपके बनाए वीडियो से किसी की मानहानि होती है, समाज में दंगा भड़कने का खतरा होता है, या देश की सुरक्षा पर आंच आती है, तो मनोरंजन का बहाना काम नहीं आएगा।

पहचान की चोरी: किसी और के चेहरे का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी करना।

फेक न्यूज़: एआई के ज़रिए गलत खबरें फैलाना।

अश्लीलता: किसी की मर्जी के बिना उसका डीपफेक बनाना।

ये सभी गंभीर अपराध हैं जिनके लिए भारी जुर्माना और जेल की सजा, दोनों हो सकती है।

क्या आपको डरने की जरूरत है? (Expert Advice)

एक लेखक के नाते मैं आपको यही सलाह दूँगा कि एआई का इस्तेमाल ज़रूर करें, क्योंकि यह भविष्य है, लेकिन ज़िम्मेदारी के साथ। भारत सरकार का मकसद तकनीक को रोकना नहीं, बल्कि उसके गलत इस्तेमाल को रोकना है। अगर आप एक क्रिएटर हैं, तो हमेशा ये 3 काम करें:

लेबल लगायें: हमेशा स्वीकार करें कि यह एआई की मदद से बना है।

सहमति लें: अगर आप किसी जीवित व्यक्ति का एआई अवतार बना रहे हैं, तो उसकी अनुमति ज़रूर लें।

सत्यता जाँचें: किसी भी एआई न्यूज़ को आगे भेजने से पहले उसे वेरिफाई करें।   

 

अंत में जरुरी बात

2026 के ये नए IT नियम हमें एक सुरक्षित डिजिटल दुनिया की ओर ले जा रहे हैं। एआई एक जादुई चिराग की तरह है, लेकिन इसका सही इस्तेमाल ही हमें डिजिटल इंडिया का असली फायदा दिलाएगा। याद रखिए, इंटरनेट पर आपकी एक क्लिक की गई फोटो सालों तक रह सकती है, इसलिए उसे साझा करने से पहले कानून और नैतिकता का ध्यान ज़रूर रखें।

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