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डिजिटल पेरेंट्स - परफेक्ट नहीं, प्रेजेंट बनें
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कुछ नहीं आता है मुझे, तभी तो चुप रहना आता है मुझे

कुछ नहीं आता है मुझे, तभी तो चुप रहना आता है मुझे
image source: AI
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Sandeep Vidyarthi11 जुलाई 2026

कुछ नहीं आता है मुझे, तभी तो चुप रहना आता है मुझे

अगर कोई समझदार होता, तो समझाता मुझे,

जो नैतिक नहीं, वो भी आजकल... नैतिकता समझाता है मुझे।

इसलिए कई बार अकेले में सोचता हूँ, कि कुछ नहीं आता है मुझे।


माना कि दुनिया के ये फरेबी खेल, समझ नहीं आते हैं मुझे,

पर अपनी सच्चाई की राह पे चलना, खूब आता है मुझे।

कई बार अकेले में सोचकर, खुद पर मुस्कुरा देता हूँ, कि

दुनियादारी के इस बाज़ार में... सच में कुछ नहीं आता है मुझे!

 

अब दुनिया बदल रही है….

सुना है… आने वाले कल में, मशीनें भी इंसानों का किरदार निभाएंगी,

स्क्रीन की इन ठंडी रोशनियों में, सच्ची संवेदनाएं कहीं छुप जाएंगी।

वहाँ बिना किसी फ़िल्टर के, बस एक सच्चा इंसान बने रहना... खूब आता है मुझे।

इसलिए शायद उस आने वाले कल के लिए भी... सच में कुछ नहीं आता है मुझे।

 

अब मैं समझने लगा हूँ... कुछ नहीं आता मुझे,

क्योंकि जिस दिन इंसान कह दे… “सब आता है मुझे”,

बस यही!समझ नहीं आता है मुझे, इसलिए सोचता हूँकुछ नहीं आता है मुझे।

संदीप विद्यार्थी

 

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हम सारे इक्कठे रहते हैं, लेकिन एक-दूसरे की… पीठ-पीछे बुराई करके खुश रहते है।

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