जिसने भरोसे में अपना दर्द सुनाया, उसी की कहानी चौराहे पर बेच आया,

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Sandeep Vidyarthi24 जुलाई 2026
जिसे भरोसे में अपना दर्द सुनाया,
उसी की कहानी चौराहे पर बेच आया,
जो सबसे ऊँची आवाज़ में सच का भाषण
देता है,
अक्सर वही झूठ का सबसे बड़ा
व्यापारी होता है।
यहाँ लोग चरित्र नहीं, चरित्र प्रमाणपत्र बाँटते हैं,
अपने दामन के दाग छिपाकर, दूसरों के कपड़े नापते हैं।
कोई अपनी जीत से नहीं, दूसरे
की हार से मुस्कुराता है,
आजकल का आदमी, चलता-फिरता तराज़ू नज़र आता है।
दीया बनना है,तो अँधेरा
मिटाओ,
सूरज बनने के चक्कर में,
किसी का आसमान मत
जलाओ।
दूसरों
की
कमियों
पर
जो
महल
खड़े
करते
हैं,
वक़्त
की
पहली
आँधी
में
वही
सबसे
पहले
ढहते
हैं।
किरदार
ऊँचा
हो
तो
आवाज़
अपने
आप
पहुँच
जाती
है,
किसी पर झूठे आरोप लगाने से उसकी हस्ती
नहीं मिट जाती है
संदीप विद्यार्थी

