एंथनी रोबल्स: एक पैर वाले पहलवान की अनस्टॉपेबल यात्रा; एक ऐसे अमेरिकी पहलवान हैं जिनकी कहानी दुनिया भर में प्रेरणा देती है।

एंथनी रोबल्स एक ऐसे अमेरिकी पहलवान हैं जिनकी कहानी दुनिया भर में प्रेरणा देती है। जन्म से ही एक पैर के साथ पैदा हुए एंथनी ने साबित किया कि इरादा मजबूत हो तो कोई बाधा रोक नहीं सकती। अगर आप एंथनी रोबल्स जीवनी हिंदी में ढूंढ रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। एंथनी रोबल्स कुश्ती की दुनिया में एक मिसाल हैं, जिन्होंने 2011 में एनसीएए चैंपियनशिप जीती। उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म "अनस्टॉपेबल" भी लोगों को मोटिवेट करती है। एंथनी रोबल्स एक पैर वाला पहलवान के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन उनकी सफलता सिर्फ शारीरिक ताकत से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती से आई है।
एंथनी का जन्म 15 जुलाई 1988 को अमेरिका के एरिजोना राज्य में हुआ था। वे जन्म से ही दाहिने पैर के बिना थे। डॉक्टरों को वजह नहीं पता चली, लेकिन एंथनी की मां जूडी ने कभी उन्हें कमजोर नहीं समझा। जूडी एक अकेली मां थीं, जिन्होंने चार बच्चों की परवरिश की। एंथनी कहते हैं कि उनकी मां ने उन्हें सिखाया, बहाने मत बनाओ, मेहनत करो। बचपन में एंथनी को बैसाखी का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन उन्होंने कभी खुद पर तरस नहीं खाया। स्कूल में बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे, लेकिन एंथनी ने खेलों में रुचि ली। फुटबॉल और बेसबॉल ट्राई किया, लेकिन कुश्ती ने उनकी जिंदगी बदल दी। 14 साल की उम्र में उन्होंने मेसा हाई स्कूल में कुश्ती शुरू की। शुरुआत में वे टीम के सबसे कमजोर खिलाड़ी थे, लेकिन कोच बॉबी विलियम्स ने उनकी हिम्मत देखी। एंथनी रोबल्स की शुरुआती जिंदगी चुनौतियों से भरी थी, लेकिन उन्होंने हर मुश्किल को मौका बनाया।
एंथनी की चुनौतियां सिर्फ शारीरिक नहीं थीं। घर में पैसे की तंगी थी, और मां को दो नौकरियां करनी पड़ती थीं। एंथनी के पिता उनके जन्म के समय ही परिवार छोड़ गए थे। लेकिन एंथनी ने कभी शिकायत नहीं की। वे कहते हैं, "मैंने सोचा कि भगवान ने मुझे एक पैर नहीं दिया, तो मैं दो पैरों वाले से बेहतर बनूंगा।" स्कूल में वे पढ़ाई में अच्छे थे, लेकिन खेल में पिछड़ जाते थे। कुश्ती शुरू करने के बाद उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पर फोकस किया। रोजाना घंटों प्रैक्टिस करते, वजन उठाते, और अपनी कमजोरी को ताकत बनाते। एक पैर होने के कारण बैलेंस बनाना मुश्किल था, लेकिन एंथनी ने अनोखी तकनीकें विकसित कीं। वे तेजी से मूव करते और रेसलर को हैरान कर देते। हाई स्कूल के पहले दो सालों में वे हारते रहे, लेकिन जूनियर ईयर में सब बदल गया। उन्होंने 48 मैच जीते बिना एक भी हारे, और एरिजोना स्टेट चैंपियन बने। सीनियर ईयर में भी यही रिकॉर्ड रहा - 48-0। कुल मिलाकर हाई स्कूल में 96-0 का अजेय रिकॉर्ड।
एंथनी रोबल्स हाई स्कूल कुश्ती में एक स्टार बन गए। लोग उन्हें "एक पैर वाला चमत्कार" कहने लगे। हाई स्कूल के बाद एंथनी को कॉलेज में एडमिशन मिलना मुश्किल था। कई यूनिवर्सिटीज ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया, क्योंकि वे सोचते थे कि एक पैर वाला खिलाड़ी कैसे कॉम्पिट करेगा। लेकिन एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी (एएसयू) के कोच शॉन चार्ल्स ने उन्हें मौका दिया। एंथनी ने वॉक-ऑन के रूप में टीम जॉइन की, यानी बिना स्कॉलरशिप के। कॉलेज में कुश्ती का लेवल बहुत ऊंचा था। एंथनी 125 पाउंड कैटेगरी में खेलते थे। पहले साल वे 5-8 का रिकॉर्ड बनाया, लेकिन हार से सीखते रहे। दूसरे साल वे सुधरे, और 2009 में पहली बार एनसीएए ऑल-अमेरिकन बने। 2010 में फिर से, और 2011 में तो कमाल कर दिया। सीनियर ईयर में वे 36-0 रहे, यानी एक भी मैच नहीं हारे। एनसीएए नेशनल चैंपियनशिप में वे टॉप सीड थे। फाइनल में आयोवा के मैट मैकडोनॉग को 7-1 से हराया। यह जीत इसलिए खास थी क्योंकि मैकडोनॉग पिछला चैंपियन था। एंथनी की कुल कॉलेज रिकॉर्ड 122-23 रहा, जो एएसयू के इतिहास में आठवां सबसे अच्छा है। उन्हें एनडब्ल्यूसीए आउटस्टैंडिंग रेसलर ऑफ द टूर्नामेंट का अवॉर्ड मिला। एंथनी रोबल्स एनसीएए चैंपियन बनकर दुनिया को दिखाया कि असंभव कुछ नहीं।
एंथनी की कुश्ती स्टाइल अनोखी थी। एक पैर होने के बावजूद वे ग्राउंड पर मजबूत थे। वे रेसलर के पैरों पर अटैक करते और बैलेंस बिगाड़ते। ट्रेनिंग में वे रोज 1000 पुश-अप्स करते, और जिम में घंटों बिताते। कोच कहते थे कि एंथनी की मेहनत दूसरों से दोगुनी है। 2011 की चैंपियनशिप के दौरान वे कई मुश्किल मैच जीते। सेमीफाइनल में उन्होंने बेन कजार को हराया, जो बहुत मजबूत था। फाइनल में मैकडोनॉग के खिलाफ एंथनी ने पहले पीरियड में 2-0 की लीड ली, और आखिर तक कंट्रोल रखा। जीत के बाद स्टेडियम में तालियां गूंजीं। एंथनी ने कहा, "यह जीत मेरी मां और उन सबके लिए है जो मुझ पर विश्वास करते हैं।" इस जीत के बाद उन्हें ईएसपीवाई अवॉर्ड मिला, जो खेल जगत का बड़ा सम्मान है। एंथनी रोबल्स अवॉर्ड्स की लिस्ट लंबी है - नेशनल रेसलिंग हॉल ऑफ फेम में शामिल, और कई अन्य। उनकी कहानी ने दिव्यांग एथलीट्स को प्रेरित किया।
कुश्ती से रिटायर होने के बाद एंथनी ने नई शुरुआत की। वे एएसयू में असिस्टेंट कोच बने, जहां युवा पहलवानों को ट्रेन करते हैं। एंथनी कहते हैं, "मैं चाहता हूं कि बच्चे सीखें कि हार मत मानो।" वे मोटिवेशनल स्पीकर हैं और दुनिया भर में लेक्चर देते हैं। उनकी किताब "अनस्टॉपेबल: फ्रॉम अंडरडॉग टू अंडिफीटेड" बेस्टसेलर बनी। इसमें उन्होंने अपनी जिंदगी की कहानी लिखी। 2024 में उनकी बायोपिक "अनस्टॉपेबल" रिलीज हुई, जिसमें जेडन स्मिथ ने उनका रोल किया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा किया और लोगों को इंस्पायर किया। एंथनी कई संगठनों से जुड़े हैं, जैसे आईसीबीए और एनविजन एक्सपीरियंस, जहां वे युवाओं को गाइड करते हैं। वे कहते हैं, "जिंदगी में बाधाएं आती हैं, लेकिन उन्हें पार करो।" एंथनी रोबल्स आज की जिंदगी में खुश हैं, शादीशुदा हैं और एक बेटे के पिता।
अंत में जरुरी बात
एंथनी की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता मेहनत से मिलती है। एंथनी रोबल्स प्रेरणादायक कहानी हर उस व्यक्ति के लिए है जो मुश्किलों से घिरा है। वे कहते हैं, "तुम्हारी कमी तुम्हारी ताकत बन सकती है।" उनकी जीवनी से सीखकर हम अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सकते हैं। एंथनी रोबल्स जैसे लोग दुनिया को बेहतर बनाते हैं। अगर आप एंथनी रोबल्स फिल्म या किताब देखना चाहें, तो जरूर ट्राई करें। उनकी अनस्टॉपेबल स्पिरिट हमें हमेशा याद रहेगी।
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