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डॉ. रमाकांत पांडा को "सबसे सुरक्षित हाथों वाला सर्जन" कहा जाता है। युवा भारतीयों में हृदय रोगों का बढ़ता खतरा; पूरी जानकारी यहाँ से देखिये

डॉ. रमाकांत पांडा को "सबसे सुरक्षित हाथों वाला सर्जन" कहा जाता है। युवा भारतीयों में हृदय रोगों का बढ़ता खतरा; पूरी जानकारी यहाँ से देखिये
image source: Canva
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Sarita22 फ़रवरी 2026
डॉ. रमाकांत पांडा को "सबसे सुरक्षित हाथों वाला सर्जन" कहा जाता है। उन्होंने 2002 में मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना की और 2022 तक लगभग 28,000 सफल हृदय सर्जरी की हैं, जिनमें 1,900 से अधिक रेडो बाईपास सर्जरी शामिल हैं। 99.8% सफलता दर के साथ, वे विश्व के सबसे सुरक्षित हृदय सर्जनों में से एक हैं। 2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। डॉ. पांडा ने जटिल मामलों में भी असाधारण परिणाम दिए हैं, जैसे कि 17 ब्लॉकों वाले हृदय में 12 ग्राफ्ट की सर्जरी और 18 घंटे की लंबी प्रक्रिया में महाधमनी विस्फार को ठीक करना।
युवा भारतीयों में हृदय रोगों का बढ़ता खतरा
हाल के वर्षों में, युवा भारतीयों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन की रिपोर्ट के अनुसार, हृदय रोग विश्व में मृत्यु का प्रमुख कारण है, और भारत में होने वाली कुल मौतों में 24.5% हृदय संबंधी बीमारियों के कारण होती हैं। खासकर शहरी क्षेत्रों में, प्रति लाख में 450 लोग हृदय रोगों से मर रहे हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह संख्या 200 है। बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां 35% से अधिक मौतें हृदय रोगों से होती हैं।
डॉ. पांडा ने हाल ही में X पर पोस्ट किए गए एक बयान में बताया कि लॉन्ग कोविड और खराब जीवनशैली के कारण युवाओं में हृदय संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। 25-30 वर्ष की आयु के लोग, जो पहले इस तरह की बीमारियों से अप्रभावित थे, अब हार्ट अटैक और स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। उदाहरण के लिए, हाल के महीनों में कई युवा हस्तियों, जैसे अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला और पुनीत राजकुमार, की कम उम्र में कार्डियक अरेस्ट से मृत्यु ने इस समस्या की गंभीरता को उजागर किया है।
हृदय रोगों के प्रमुख कारण
युवा भारतीयों में हृदय रोग के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण हैं:

1.     गलत जीवनशैली: शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव, और अनियमित नींद हृदय स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही है।

2.     जंक फूड का सेवन: अधिक कैलोरी और ट्रांस फैट युक्त भोजन से कोलेस्ट्रॉल और मोटापा बढ़ता है, जो हृदय पर दबाव डालता है।

3.     धूम्रपान और शराब: ये आदतें रक्तचाप और रक्त वाहिकाओं पर बुरा प्रभाव डालती हैं।

4.     आनुवंशिक कारक: हृदय रोगों का पारिवारिक इतिहास जोखिम को और बढ़ाता है।

लक्षण जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
हृदय रोगों के लक्षणों को पहचानना और समय पर उपचार लेना जीवन रक्षक हो सकता है। कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:सीने में दर्द या बेचैनी, बाएं कंधे, कोहनी, जबड़े, या पीठ में दर्द, सांस लेने में तकलीफ चक्कर आना, उल्टी, या अत्यधिक पसीना
डॉ. पांडा सलाह देते हैं कि इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत किसी कार्डियोलॉजिस्ट या कार्डियोथोरेसिक सर्जन से संपर्क करें।
हृदय रोगों से बचाव के उपाय
हृदय रोगों से बचने के लिए डॉ. पांडा और अन्य विशेषज्ञ निम्नलिखित उपाय सुझाते हैं:

1.     स्वस्थ आहार: बेरीज, हल्दी, और हरी चाय जैसे सूजन-रोधी खाद्य पदार्थों का सेवन करें। जंक फूड से बचें।

2.     नियमित व्यायाम: रोजाना 30 मिनट की मध्यम शारीरिक गतिविधि हृदय को स्वस्थ रखती है। लेकिन अधिक तीव्रता वाले व्यायाम से बचें, खासकर अगर आपको हृदय संबंधी समस्या है।

3.     तनाव प्रबंधन: ध्यान, योग, और गहरी सांस लेने की तकनीक तनाव को कम करती हैं।

4.     नियमित जांच: उच्च रक्तचाप, मधुमेह, और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करवाएं।

5.     धूम्रपान और शराब से परहेज: ये आदतें हृदय रोग के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं।

कार्डियोलॉजिस्ट बनाम कार्डियोथोरेसिक सर्जन
हृदय रोगों के उपचार में दो प्रकार के विशेषज्ञ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
कार्डियोलॉजिस्ट: ये दवाओं और गैर-सर्जिकल प्रक्रियाओं (जैसे एंजियोप्लास्टी) के माध्यम से हृदय रोगों का इलाज करते हैं।
कार्डियोथोरेसिक सर्जन: डॉ. पांडा इस क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं। ये ओपन-हार्ट सर्जरी, बाईपास सर्जरी, और वाल्व रिपेयर जैसी जटिल प्रक्रियाएं करते हैं। 
अंत में जरुरी बात
डॉ. रमाकांत पांडा ने युवा भारतीयों में बढ़ते हृदय रोगों की समस्या को गंभीरता से लेने की सलाह दी है। उनकी विशेषज्ञता और अनुभव हमें यह सिखाते हैं कि समय पर निदान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हम अपने हृदय को सुरक्षित रख सकते हैं। यदि आप या आपके प्रियजन हृदय संबंधी लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। हृदय स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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